सांभर में पक्षियों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के लिए किए जाएंगे अनवरत प्रयास


जयपुर, 27 नवम्बर। दुनियाभर के सूदूर क्षेत्रों से मीलों का सफर कर सांभर झील पहुंचने वाले विभिन्न प्रजातियों के पंछी हमारे मेहमान हैं और इनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने और वर्तमान त्रासदी जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मिलित प्रयास सुनिष्चित किए जाने की आवष्यकता है, लेकिन सांभर सॉल्ट लिमिटेड उसी आवास का हिस्सा होने के कारण उसकी जिम्मेदारी अहम् हो जाती है। इसमें सबसे पहले झील के 90 वर्गकिमी क्षेत्र को कारकस से मुक्त किया जाना जरूरी है। जिला कलक्टर श्री जगरूप सिंह यादव ने बुधवार को हुई जिला पर्यावरण समिति की अध्यक्षता करते हुए इस सम्बन्ध में अधिकारियों को कई निर्देष प्रदान किए।


श्री यादव ने कहा है कि सांभर झील में तत्परता से एवं समय पर बचाव कार्य प्रारम्भ किए गए, जिससे लगातार पक्षियों की मौतों में कमी आई है लेकिन स्थिति नियंत्रण में होने के बावजूद निरापद नहीं कही जा सकती जब तक कि एक भी संक्रमित कारकस झील क्षेत्र में रहे। उन्होंने सांभर सॉल्ट्स लिमिटेड के महाप्रबन्ध को निर्देष दिए कि जपोक डेम में कहीं-कहीं, गहराई वाले पानी में और पूरे झील इलाके में अभी भी मृत पक्षियों के शव हो सकते हैं और एक भी संक्रमित मृत पक्षी का शव चेन रिएक्षन से कई पक्षियों की जान ले सकता है,  इसलिए हर हाल में कारकस झील क्षेत्र से दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने 40 से 50 अतिरिक्त श्रमिकों की व्यवस्था कर कारकस निकलना सुनिष्चित करने एवं यह अभियान एक माह तक और जारी रखने के निर्देश दिए हैं ताकि लाखों की संख्या में झील में पहंुच रहे स्वस्थ्य पक्षियों को बोटूलिज्म प्रभावित मृत पक्षियों को खाने से बचाया जा सके।


श्री यादव ने सांभर सॉल्ट्स प्रबन्धन को अपने कार्मिकों को गम बूट, दस्ताने उपलब्ध कराने एवं क्षेत्र में जगह-जगह उच्च क्षमता की दूरबीनों के साथ वॉच टावर स्थापित करने को कहा है ताकि समय-समय पर यहां लिया डेटा रिकॉर्ड में रखा जा सके। उन्होंने हर समय कुछ ऐसे वाहनों की व्यवस्था अपने यहां रखने को कहा है जिसमें झील क्षेत्र का सर्वे किया जा सके। श्री यादव ने कहा कि वर्तमान त्रासदी में यहां एल्गी टॉक्सेनिटी नहीं थी लेकिन इसकी आषंका को देखते हुए अब समय-समय पर झील के पानी की बायलॅाजिकल एवं कैमिकल जांच कर इसका डेटा भी रिकॉर्ड एवं शेयर किया जाना चाहिए।
जिला कलक्टर ने सम्पूर्ण 90 वर्ग किमी झील क्षेत्र का ड्रोन सर्वे कराकर इसका भी रिकॉर्ड संधारित करने को कहा है एवं वर्तमान स्थिति में प्रतिदिन मॉनिटरिंग कराने के लिए निर्देषित किया है। बैठक में डीएफओ कविता सिंह ने बताया कि मंगलवार तक झील के जयपुर क्षेत्र में 9358 मृत पक्षी हटाए जा चुके हैं, 632 को रेस्क्यू किया गया है एवं 143 को रिंग पहनाई गई है। बैठक में वन विभाग, पषुपालन विभाग, सिविल डिफेंस, एसडीआरएफ, वेटेनरी, चिकित्सा एवं अन्य सम्बन्धित विभागों के प्रतिनिधि, सांभर सॉल्ट्स लिमिटेड एवं एनजीओ के सदस्य शामिल हुए। बैठक में जिला कलक्टर श्री यादव द्वारा दिए गए अन्य मुख्य निर्देषः-


- समय-समय पर झील क्षेत्र का ड्रोन सर्वे कराया जाए एवं उसका टेबुलेषन कर रिकॉर्ड रखा जाए।
-वन विभाग ने सांभर सॉल्ट्स से तीन प्वाइंट पर ड्रॉन सर्विलांस की मांग की है।
- झील क्षेत्र में ट्यूरिस्ट यूनिट एवं इंडस्ट्रियल यूनिट्स, किचन वेस्ट, सीवरेज के डिस्पोजल एवं स्थापना की शर्तों की समय-समय पर जांच की जाए।
-झील में पंछियों के प्राकृतिक आवास को नष्ट, प्रभावित करने वाली गतिविधियां नहीं हों। यथा एडवंेचर गतिविधियां, डीजे आदि का ध्वनि प्रदूषण एवं तीव्र ल्यूमिनस वाली लाइटों से लाइट प्रदूषण नहीं हो, इसपर निगरानी रखी जाए। साथ ही बिना प्रषासन से सक्षम अनुमति  के शूटिंग भी प्रतिबंधित रहे।
-एसडीआरएफ की टीम गहरे पानी में कारकस की तलाष करे।
-जिले के अन्य वेटलैण्ड पर भी निगरानी रखी जाए।
-जिला स्तरीय पर्यावरण समिति के साथ उपखण्ड स्तर पर भी समितियों को सक्रिय किया जाए।
- एसडीआरएफ के काम की मॉनिटरिंग के लिए एक सक्षम टीम लीडर लगाया जाए।
- सांभर में ग्राउण्ड वाटर के सैम्पल लिए जाएं एवं अवैध रूप से चल रहे बोर वैल बंद कराए जाएं।
-ऐसी घटना होने पर चिकित्सा विभाग की टीम अभियान में काम कर रहे कार्मिकों को सुरक्षित रहकर कार्य करने में सहायता करे।
- विद्युत के अवैध लाइव वायर की समस्या दूर करने के लिए अजमेर एवं नावां कलेक्टर्स से बात कर इनकी बिजली बंद कराने के लिए कहा।


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