बालश्रमिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की सार्थक प्रयास । 86 हजार लोंगो से सीधा संवाद, 100 बस्तियों में जागरूकता के दौरान 126 बालश्रमिकों की पहचान।


जयपुर, 17 दिसंबर, नन्हे हाथों में कलम पकडाने के उस्द्देष्य से बालश्रम उन्मूलन अभियान एक
सप्ताह तक तीन कारवां रथों के माध्यम से कमजोर वर्ग की सौ बस्तियो में सघन जागरूकता
की अलख जगाते हुए समझाईस, विडियों-ऑडियो के माध्यम से घर-घर दस्तक देकर विभिन्न
क्षेत्रों में बालश्रम कर रहे बच्चों को शिक्षा के महत्व के बारे मे बताया। श्रम विभाग, यूनिसेफ
एवं पीसीसीआरसीएस के संयुक्त तत्वावधान में चलाए गये अभियान में कई तरीके के प्रेरक
पोस्टर जिसमें बालश्रम को अभिषाप एवं स्कूल के महत्व को दर्षाया गया था, जिनके माध्यम
से लोगो को बालश्रम के दुष्परिणामो की जानकारी दी गयी। इस अभियान में आमजन के
साथ स्वय सेवी संस्थाओं ने भी बढचढ कर हिस्सा लिया। पुलिस एकेडमी की तरफ से
अभियान को सफल बनाने के लिए समन्वयकों सफिस्ता, फैयाज एवं लालाराम के साथ निरन्तर
समन्वय बनाकर घर घर जाकर लोगो से समझाईस की। आगरा रोड में जेडीए द्वारा दो दर्जन
से ज्यादा पूनर्वासित कच्ची बस्तियों में कमजोर वर्ग के लोग निवास करते हैं । आर्थिक तंगी के
चलते महिलाएं शहर जाकर घरों में कार्य करते हैं । बच्चे नगीने की घिसाई, कचरा बिनने जैसे
बालश्रम करते हैं । पांच किमी की परिधि में कोई राजकीय विद्यालय नही होने के कारण बच्चे
स्कूल नही जा रहे हैं । ऐसे 53 और घूमन्तु जाति के 73 बच्चों की पहचान कर श्रम विभाग के
संयुक्त श्रम आयुक्त धर्मपाल चौधरी को रिपोर्ट अभियान दल ने सौपी। संयोजक विपिन तिवारी
ने बताया कि षिक्षा से वंचित इन बच्चो के लिए राष्ट्रीय बालश्रमिक परियोजना अन्तर्गत विष ेष
विद्यालय खुलवाने के प्रयास किये जायेंगे । तिवारी ने बताया अभियान के दौरान लगभग
85000 लोगों से सीधा सम्पर्क कर बालश्रम के खिलाफ सन्देश देकर शिक्षा के महत्व की
समझाईस की गई।


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