लोकसभा में विलायती बबूल की रोकथाम के लिए कार्य योजना बनाने की मांग


जयपुर सांसद श्री रामचरण बोहरा ने आज लोकसभा में नियम 377 के तहत् पर्यावरण व जल संरक्षण एवं उपजाऊ भूमि को बंजर होने से बचाने के लिए विलायती बबूल को खत्म करने या इसके रोकथाम के लिए केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री प्रकाष जी जावड़ेकर से विषेष कार्य योजना बनाने की मांग कर सदन का ध्यान आकर्षित किया।


सांसद बोहरा ने लोकसभा में बोलते हुए कहा कि हमारे देश में हानिकारक वनस्पति विलायती बबूल (जूलिस-फलूरा) धीरे-धीरे उपजाऊ भूमि को बंजर बनाती जा रही है, जिसका सर्वाधिक प्रभाव राजस्थान में पड़ा है। इस वनस्पति के कारण पर्यावरण, वन्य जीव-जन्तु, पेड़-पौधों एवं उपजाऊ भूमि सर्वाधिक प्रभावित हुई है। वैज्ञानिकों द्वारा किये गये शोध से भी पता चला है कि यह वनस्पति हमारी उपजाऊ भूमि को इतना बंजर कर देती है कि इसके आस-पास कोई भी पेड़-पौधा नहीं पनप पाता है। यहां तक कि इसकी जड़े पानी की तलाश में जमीन में 175 फिट तक चली जाती है, जिससे भूजल स्तर भी काफी नीचे चला जाता है।


सांसद बोहरा ने कहा कि इस विलायती बबूल की लकड़ी भी किसी भी उपयोग में नहीं आती है और इस लकड़ी के जलाने से कार्बन डाइआॅक्साईड गैस का अत्यधिक उत्सर्जन होता है, जिससे पर्यावरण में भी विषैली गैसों की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है। यह पेड़ मलेरिया एवं मच्छरजनित बिमारियों को पनपने में भी योगदान करता है, क्योंकि इसकी पत्तियों में मौजूद तत्व मच्छर के पोषण का कार्य करते हैं।


सांसद बोहरा ने सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री उज्जवला गैस योजना प्रारम्भ की गई है, जिसके द्वारा अब तक लगभग 8 करोड़ गैस कनेक्षन जारी कर महिलाओं के स्वास्थ्य को धूंए एवं जहरीली गैसों से बचाने जैसा जनहित कार्य किया है।


सांसद बोहरा ने लोकसभा अध्यक्ष के माध्यम से केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री प्रकाष जी जावड़ेकर से विलायती बबूल के रोकथाम के लिए विषेष कार्य योजना बनाने का अनुरोध किया, ताकि उपजाऊ भूमि को बंजर होने से बचाया जा सके। साथ ही पर्यावरण एवं जल संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सके।


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