नगरीय विकास मंत्री ने दिए जयपुर शहर से डेयरियों की शिफ्टिंग एवं कचरा निस्तारण के लिए विस्तृत योजना बनाने के निर्देश


जयपुर, 24 दिसम्बर। जयपुर जिले के प्रभारी नगरीय विकास मंत्री श्री शांति धारीवाल ने शहर में चल रही डेयरियों को बाहर षिफ्ट करने के मामले में नगर निगम अधकारियों को योजना बनाने के निर्देष दिए हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए शहर से बाहर बड़ी भूमि चिन्हित कर प्लाॅटिंग की जाए जिसमें आवास, गोबर गैस प्लांट एवं अन्य आवष्यक सुविधाएं विकसित की जाएं ताकि षिफ्टििंग के बाद डेयरी संचालक वहां अपना व्यवसाय आसानी से कर सकें।


श्री धारीवाल मंगलवार को जिला कलक्टेªट सभागार में विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक लेने के बाद मीडिया को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होेंने बैठक में सफाई व्यवस्था को नगर निगम का प्राथमिक कार्य बताते हुए कहा कि शहर में साफ-सफाई की व्यवस्था को लेकर कई षिकायतें हैं और वे स्वयं भी संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने वार्डों की संख्या बढने पर शहर में साफ-सफाई के लिए संसाधनों की आवष्यकता एवं कचरे का मात्रा को देखते हुए विस्तृत व्यावहारिक योजना बनाकर प्रस्तुत करने के निर्देष दिए। उन्होंने इसके लिए कई वार्डों का एक क्लस्टर बनाकर संविदा तय करने का सुझाव दिया। उन्होंने शहर में आवारा पषुओं, बंदरों एवं कुत्तो की समस्या के समाधान के लिए भी योजना बनाने को कहा।


प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बैठक में अथवा जिला प्रषासन को जो भी आंकडे़ योजनाओं की प्रगति के रूप में दिए जाएंगे, उनकी जांच होगी। अगर कोई विभाग बढ़ा-चढ़ाकर आंकडे़ देगा तो सोषल आॅडिट में पता चल जाएगा। इसके अलावा अब योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट में लाभार्थी के फोन नम्बर एवं आधार कार्ड नम्बर जैसी सूचनाएं भी शामिल की जाएं ताकि लाभार्थियों से बात कर वास्तविकता की जांच की जा सके। उन्होंने कहा कि  जिला कलक्टेªट में एक सोषल आॅडिट सैल का गठन किया जाएगा जो विभिन्न विभागों से प्राप्त होने वाली योजनाओं की प्रगति के आंकड़ों की आॅडिट करेगी। उनके द्वारा विभागों के आंकड़ों की रिपोर्ट के आधार पर विभागों की परफोर्मेंस जांची जाएगी। श्री धारीवाल ने शहर से डेयरियों को षिफ्ट करने, शहर में कचरा प्रबन्धन एवं सफाई, जल गुणवत्ता जांच, वंचित क्षेत्रों में जलापूर्ति जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तृत योजना बनाकर 10 जनवरी तक जिला कलक्टर को प्रस्तुत करने के इन विभागों के अधिकारियों को निर्देष दिए हैं।


उन्होंने पत्रकारों को बताया कि मंगलवार की बैठक में 17-18 विभागों के कामकाज की समीक्षा की गई। कई विभाग आषानुरूप प्रदर्षन नहीं कर सके लेकिन यह पहली बैठक थी, आगे और सुधार करने के निर्देष दिए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को अपने काम के प्रति ईमानदार रहने और सही आंकडे़ ही देने को कहा।


श्री धारीवाल ने बिजली काॅल सेंटर के सम्बन्ध में आने वाली षिकायतों की स्थिति में सुधार करने के डिस्काॅम के अधिकारियों को निर्देष दिए। साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति एवं वर्तमान में बिजली उपलब्धता बाबत जानकारी  ली। उन्होंने निर्देष दिए कि पीएचईडी के अधिकारी शहर में 50 से अधिक व्यक्तियों के आवागमन वाले सभी होटल, आवासीय परिसरों, वाणिज्यिक संस्थानों में विजिट कर बूस्टर के उपयोग बाबत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। साथ ही जर्जर सीवरेज लाइनों के कारण पानी के प्रदूषण के नियंत्रण के लिए पीएचईडी में एक कन्टेमिनेषन कन्ट्रोल विंग बनाने की संभावनाएं देखने को कहा। उन्होंने पीएचईडी के अधिकारियों को जलापूर्ति में होने वाले आर्थिक नुकसान को रोकने की योजना, काॅलोनियों में पानी की गुणवत्ता की जांच की सैम्पल संख्या की रिपोर्ट एवं  जलदाय विभाग की पाइपलाइन की नियमित आपूर्ति से वंचित 30 प्रतिषत आबादी को जलापूर्ति की योजना पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।


श्री धारीवाल ने सार्वजनिक निर्माण विभाग से शहरी क्षेत्र में सड़कों की मरम्मत एवं  पेचवर्क की स्थिति की जानकारी ली एवं संभाग मुख्यालयो में पीडब्ल्यूडी की सड़कों की स्थिति की रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने के निर्देष दिए। स्कूल बिल्डिंगों एवं अस्पतालों के भवनों की मरम्मत की स्थिति की भी समीक्षा की।


नगरीय विकास मंत्री ने शहर में खोले गए जनता क्लिनिकों की स्थापना, उन पर आने वाले व्यय, संधारण की प्रक्रिया, चिकित्सक एवं पैरा मेडिकल स्टाफ की स्थिति, वहां मुख्यमंत्री निःषुल्क दवा योजना में मिलने वाली दवाओं एवं मुख्यमंत्री निःषुल्क जांच योजना में जांचों की संख्या के बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी से जानकारी ली। उन्होेने पुलिस अधिकारियेां को निर्देष दिए कि वे अपने थाना क्षेत्रों में बजरी निकाले जाने की सूचना माइनिंग विभाग एवं सम्बन्धित अधिकारियों को देकर इस पर लगाम लगाएं।


उन्होंने सिलिकोसिस योजना का लाभ हर पात्र को पहुंचाने के लिए उनके चिन्हीकरण की प्रक्रिया तय करने एवं योजना बनाने को कहा। उन्होंने कहा कि रोग होने के बाद सहायता करने के साथ ही इस रोग के प्रसार को रोकने के लिए पत्थर घिसाई एवं ऐसे अन्य उद्योगों के मजदूरों मास्क आदि प्रदान किए जाने चाहिए।


प्रभारी मंत्री ने पालनहार योजना, जिले में बीमालाभ पाने वाले कृषकों की संख्या, रसद विभाग द्वारा शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में लाभार्थियों को सरकारी योजना में गेहूं-चीनी आदि का वितरण, वन विभाग द्वारा रोपे गए पौधों के लिए संरक्षण की योजना समेत कई विभागों की योजनाओं एवं उपलब्धियों की समीक्षा की। बैठक में जिले प्रभारी सचिव एसीएस श्री सुबोध अग्रवाल, जिला कलक्टर डाॅ.जोगराम, नगर निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री वी.पी.सिंह, जिला परिषद की मुख्य कार्याकारी अधिकारी श्रीमती भारती दीक्षित एवं चिकित्सा, सानिवि, पीएचईडी, पंचायती राज एवं अन्य विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए।


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