जिले के सभी दुधारू पशुओं का पंजीकरण प्रारम्भ - आधार कार्ड समान महत्वपूर्ण होगी ‘ईनाफ पहचान’ -पशुओं का ई-मार्केट विकसित करने के प्रयास, संक्रामक रोगों की होगी रोकथाम

जयपुर, 31 जनवरी। जयपुर जिले के समस्त दुधारू पषुओं (गाय एवं भैंस वंष) में टेगिंग कर उनके पंजीकरण का कार्य बडे़ स्तर पर प्रारम्भ किया जा रहा है। इस डेटाबेस के संग्रह से स्थानीय एवं वैष्विक स्तर पर पषुओं के क्रय-विक्रय में उचित मूल्य हेतु ई-मार्केट का विकास किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह योजना पशुपालकों की आमदनी बढाने में लाभकारी होगी एवं ईनाफ पोर्टल पर टेग नम्बर के माध्यम से पशु की समस्त जानकारी घर बैठे ही प्राप्त की जा सकेगी।


पषुपालन विभाग के संयुक्त निदेषक डॉ.उम्मेद सिंह ने बताया कि पशुओं का विस्तृत डेटाबेस तैयार करने के इस कार्य के लिए पशु पालन विभाग द्वारा सम्बन्धित संस्थाओं, अधिकारियों-कर्मचारियों की टीमों का गठन किया गया है। पशुपालन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी पशुपालकों के यहां डोर-टू-डोर जाकर पशुओं का पंजीकरण एवं टेगिंग कर रहे हैं।


उन्होंने बताया कि पशुओं का पंजीकरण किए जाने से प्रत्येक पशु की पहचान सुनिष्चित की जा सकेगी। इससे नस्ल सुधार संबंधित जानकारी के द्वारा उन्नत नस्ल के पशुवंष का संरक्षण एवं संवर्धन हो सकेगा। साथ-साथ टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, नाकारा नस्ल के पशुओं का बाधियाकरण का रिकॉर्ड संधारण करने में आसानी होगी।


उन्होंने बताया कि इस अभियान से एक राज्य से दूसरे राज्य में पषुओं के संक्रामक रोगों के प्रसार एवं संक्रमण पर अंकुष लगेगा। पशुओं का अनुवांषिक ब्यौरा संकलित किया जा सकेगा जिससे पशुओं की उन्नत नस्लों का संरक्षण एवं संवर्धन होगा। इस कार्यक्रम से पशु स्वास्थ्य संबंधी समस्त जानकारी जैसे समस्त टीकाकरण एवं रोगों की रोकथाम की संकलित जानकारी संधारित की जाएगी।


पषुपालन विभाग के वरिष्ठ पषु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि समस्त पंजीकृत पषुओं एवं पषुपालकों की सम्पूर्ण जानकारी ईनाफ सॉफ्टवेयर में इंद्राज किया जाना आवष्यक है। ईनाफ टेगिंग में पषुओें की समस्त जानकारी ‘आधार कार्ड’ के समकक्ष महत्व की होगी, जिससे पषुपालकों को राज्य सरकार, पषुपालन विभाग की नवीन योजनाओं का लाभ देने में सुगमता होगी।


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