कम्यूनिटी साइकोलॉजी विषय पर दो दिवसीय इण्टरनेषनल कांफ्रेस का हुआ समापन”


जयपुर। 01 फरवरी, षारिरिक रूप सें स्वस्थ होतें हुये भी व्यक्ति को कभी कभी किसी मानसिक अवसाद या किसी सामाजिक व मानवीय समस्या सें होकर गुजरना पडता है। लगातार इस मनोदषा के चलतें धीरे धीरें उसके अंदर डिप्रेषन एंव एंग्जाइटी जैसी बीमारियां उसें खतरनाक स्थिति तक पहुंचा सकती है। ऐसे ही विचारों के साथ डिर्पाटमेंट ऑफ साइकोलाजी, सेंट विल्फ्रेडस् पी.जी.कॉलेज एंव छत्रपति षिवाजी महाराज यूनिवर्सिटी, मुंबई कें द्वारा आयोजित एंव कम्यूनिटी साइकोलॉजी एसोसिएषन ऑफ इंडिया के सहयोग से कम्यूनिटी साइकोलॉजी विषय पर जी.डी. बडाया ऑडिटोरियम में दों दिवसीय इण्टरनेषनल कांफ्रेस का समापन किया गया। कांफ्रेस कें समापन सामारोह में मुख्य अतिथि राज ऋषि भर्तृहरि मतस्य विष्वविधालय अलवर के वाइस चांसलर प्रो. जे.पी. यादव, कांफ्रेस के संरक्षक डॉ. केषव बड़ाया, सीपीएआई सचिव प्रो. रामजी लाल, प्रो. ए.वी.एस मडनावत ,सीनियर एडवोकेट डॉ अखिल षुक्ला नें षुरूआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इसके पष्चात डॉ. बड़ाया ने मुख्य अतिथि का राजस्थानी परम्परानुसार साफा पहनाकर एवं शॉल, स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया।


मुख्य अतिथि प्रो. जे.पी. यादव नें कम्यूनिटी साइकोलॉजी थीम की सराहना करतें हुये अपनें षैक्षणिक एंव प्रषासनिक कार्यो में मनोविज्ञान की महत्वता एंव उपयोगिता कों अपनें अनुभवों कें रूप में षेयर करतें हुये कहा कि किसी भी जगह हम रहें चाहें वह समाज हों या कार्यस्थल हों वहॉ हमें नेेगेटिविटी और स्टेªस सें दूर रहनें की अपील करी।


फॉरेन डेलीगेट्स के सेषन में इथोपिया सें प्रो बालासुब्रमण्यम नें लेटेस्ट डेवलपमेंट इन कम्यूनिटी साइकोलॉजी विषय पर क्लिनिकल साइकोलॉजी पर चर्चा करतें हुये मेंटल एंव हैल्थ काउंसलिंग पर बात करीं। श्रीलंका सें डॉ समीम नें षिक्षण संस्थानों में काउंसलिग प्रोग्रामस में मार्गदर्षन करतें हुये विधार्थियों के सामाजिक एंव व्यक्तित्व विकास में सहायक साबित होतें है। टोक्यों सें डॉ रवि मेधनकर नें मेडटेषन एंव पीस ऑफ मांइड पर बात करतें हुये कहा कि मन कभी भी षांत नहीं होता, अ-मन षांत होता है। मन का स्वभाव है, तनावपूर्ण रहना, अव्यस्त रहना, इसलिये प्रतिदिन सामान्य क्रियाओं के बारे में सजग रहना सीखों, और जब अपनी सामन्य क्रियाएं कर रहें हो तब रिलेक्स रहतें हुये तनाव सें दूर रहनें कों कहा। काठमांडु सें डॉ नरेन्द्र थुगना नें साउथ एषिया के संदर्भ में सुसाइड प्रीवेषन पर बात करतें हुये कहा कि प्रत्येक वर्ष आत्महत्या करनें वालों की संख्या प्रतिदिन बढती जा रही है। समाज की अलग अलग संस्कृतियों और हर वर्ग में आत्महत्या की वजहें अलग अलग है, लेकिन हमें ये ध्यान रखना चाहिए कि आत्महत्या मृत्यु का सबसें निरोध्य कारण है, यानी इसें रोका जा सकता है और इसकें लिये कम्यूनिटी साइकोलॉजी यानि समुदाय के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। नेपाल के डॉ नारायण प्रसाद ने स्वास्थय और अन्य भलाई के मुद्यों पर रिपोर्टिग किस तरह करीं जाये ताकि समुदाय में किसी भी प्रकार का नेगिटिवटी या गलत संदेष ना जाये।


कांफ्रेस की आयोजन सचिव डॉ मनीषा तिवारी नें बताया कि वाषिंगटंन सें षैनन षूमेकर, यूनिवर्सिटी ऑफ प्रोविडेंस सें सचिन जैन, टैक्सास यूनिवर्सिटी सें रमोना, पेन्सिलवेनिया सें बैरी जैकसन एंव 200 रिर्सचर दूसरें दिन पांच टैक्नीकल एंव पैनल डिस्क्षन सेषन में जेंडर सेनसेटाजेषन, जेंडर वाइलेंस, जेंडर इनइक्वालिटी, सुसाइड प्रीवेषन, भ्रूण हत्या जैसी गंभीर विषयों पर चर्चा करीं।


कांफ्रेस के संरक्षक डॉ. केषव बड़ाया ने कहा कि वर्तमान समय में सोषल मीडिया जों कि आज सभी की जरूरत बन गया है, और इसकें अनेको लाभ भी है लेकिन निरन्तर इसकें संपर्क में रहनें सें समुदाय के लोगों में खासकर युवा एंव बच्चों में भावनात्मक और मानसिक स्वास्थय कों इसनें खासा प्रभावित किया है। इस दों दिवसीय इण्टरनेषनल कांफ्रेस में टोक्यो, नेपाल, वाषिंगटन, टैक्सास, पेन्सिलवेनिया, कोलंबो, इथोपिया सहित देष भर की तमाम यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ व्याख्याता व रिर्सचरर्स ने भारतीय परिपेक्ष्य में कम्यूनिटी साइकोलॉजी की उपयोगिता एंव समस्याओं की चर्चा करतंें हुये नवीनतम ज्ञान एंव षोध से अवगत करवाया। अंत में ओरल प्रजेंटेषन प्रतिभागियो को अवार्ड एंव प्रषस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।


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